""तब तुम्हे समझेगा ।।।""
तुम्हारे बच्ची बेटी माँ के साथ जब बलात्कार होगा ,,,
तब तुम्हे समझेगा ।।।
जब कोई शराब पिके तुम्हारे या तुम्हारे घरवालो के उपर गाडी चढायेगा ,,,
तब तुम्हे समझेगा ।।।
जब कोई चोर डाकु तुम्हे लुटेगा ,,,
तब तुम्हे समझेगा ।।।
जब रोड के किसी गड्डे मे जाकर तुम गिरोगे ,,
तब तुम्हे समझेगा ।।।
तुम्हारा बच्चा जब हॉस्पिटल मे ऑक्सिजन के कारण मरेंगा ...
तब तुम्हे समझेगा ।।।
जब तुम्हे किसीसे प्यार होगा और वो दुसरे कास्ट या धर्मकी होगी तब सारे दुनिया तुम्हारे खिलाप जायेगी ,,,
तब तुम्हे समझेगा ।।।
जब तुम्हारे बेटे बेटीया नोकरीया तलाशते भटकेंगे ,,,
तब तुम्हे समझेगा ।।।
कवि : विजय नामदेव त्रिभुवन
मो. नं. 8605895244
संघर्षनगर मुकुंदवाडी औरंगाबाद
महाराष्ट्र
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