कल और आज
"" कल और आज ""
कल जो चलते थे सिना तानके
आज वो चलते ही नहीं
कल जो करते थे कंजुषी
आज वो अमीर है ।
कल जो पैसे बचाने के लिए पैदल चलते थे ।
आज वो तंदरूस्त है ।
कल जो हसते थे उनपे
आज वो खुद पर ही रोते है ।
कल जो मिलते थे सबको
आज उनको हर कोई मिलता है ।
कल जो देते थे ईज्जत दुसरों को
आज उनकी ईज्जत करते है सब
कल जो मेहनत करके खाथे थे ।
आज उनके घर परही दिवाळी है।
बाकी का तो दिवाळा है ।
विजय नामदेव त्रिभुवन
स. शि. जिपप्राशा जुसाका
केंद्र/ ता. फुलंब्री जि.औ.बाद
मो.नं. 8605895244
औरंगाबाद
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