खुदा से अपनो की खैरीयत

खुदा ने मुझे मेरी खैरीयत के लिय कुछ मागने के लिये कहा.
हमे खैरीयत कहा चाहिय थी
हमने कुछ अपने लिय नहीं मांगा
सिर्फ अपनो की सब ख्वाईशे पुरी हो ये मांगा.
खुदा का बंदा हुँ .तो खुदा रोने लगा.
बोला ये क्या मांगा तुने
मुझे तुझे खुश रखना था .
मैने कहा मेरी खुशी तो
मेरे अपनो की खुशी मे है।

खुदा बोला उनके ख्वाईश मे
तु कही भी नही है ।
तु तो सिर्फ एक मशिन है
उनकी जरूरत पुरी करने की.
उनके लियतो तु सिर्फ एक पत्थर है,
तुझपे पैर रखकर वो ऊपर जायेगे.
उनकी नाकामीयो की तु  तो वजह है.
उनकी रोने की तु तो वजह है.

खुदा का दर्द मुझे देखा नही गया.
खुदा को मेरी खुशी चाहिय थी.
लेकीन मैने उससे ऐसा करने नही दिया.
लेकीन मैने खुदा से कुछ ऐसा कहा की खुदा भी खुश हो गया.
मैने अपना सब लुटाके ये खुदा मैने तेरे को पा लिया.
वो मुझ पत्थर पर पाव रखकर उपर जायेगे लेकिन वहा से वापस कैसे आयेगे.
अब वो अपनी नाकामीयोका जिम्मेदार किसे मानेगे.
उनकी ख्वाईशे ही उनको डुबायेगी.

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