हरामाची कमाई

*** हरामाची कमाई ***

माणसाला बनवती नात्यातील कसाई.
हरामाची कमाई करून पैसे कमवतो.
कुटूंबाचे व स्वतःचे आयुष्य खड्यात घालतो.
कुदरत का कानुन है ये .

जो तुम्हारा नहीं वो तुम्हारे पास रहता नहीं ।
कितना भी कमावो काळा धन.
तुम्हारा अच्छा नहीं रहेगा तन.
हमेशा बैचेन रहेंगा तुम्हारा मन.

उपर की कमाई को मलाई मत समझो.
उपर की कमाई तो बुराई है |
तुम्हारा घर,संसार नष्ट करने वाली ये दवाई है |
तुम्हारा हराम का धन ले जायेगा जमाई.

किसी को आने वाली कमाई के पहले ही लेनी पडती है .
उतनी ही पैसे की दवाई.

✍कवि:विजय नामदेव त्रिभुवन
           मो नं. ८६०५८९५२४४
           मुकूंदवाडी औरंगाबाद

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