ये फिल्म नहीं है ।।।

माझी नविन कविता नक्की वाचा.

ये फिल्म नहीं है ।।।

ये फिल्म नहीं है,
तुम्हे दुसरा मौका नहीं मिलने वाला है ।
ना तुम्हारी यादांश जायेगी,
ना तुम्हारी यादांश वापस आयेगी,
ना तुम्हारा कोई पुनर्जन्म होंगा,
ना कोई तुम्हे बचाने आयेगा,
ना कोई जादु होगी,
ना कोई चमत्कार होगा.

फिल्म का हिरो तो देड घंटे बाद संभळ जाता है ।
तुम्हारी लाईफ तो देड घंटे बाद  बदलने वाली नही है ।
तुम गिरने के बाद ना तुफान आयेगा,
ना मंदिर की घंटी बजेगी ।
फिल्म के हिरो को तो मदत करने के लिय.कोई भी मिल जाता है ।
फिल्म के हिरो को तो दुसरा मौका मिल जाता है  पर
तुम्हारा क्या होगा कालिया.

             ✍✍✍
कवि. विजय नामदेव त्रिभुवन
     मो. नं. 8605895244
   संघर्षनगर मुकूंदवाडी।     
             औरंगाबाद

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